October 16, 2019

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धरा को बचाले == अनिरुद्ध कुमार सिंह,

रावण कहे राम से,
ठहाका मार के।
तीर धनुष रक्खो ना,
जरा सम्भाल के।।
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अपना बाहुबलीपन,
किसको दिखा रहें।
रावण तो दिल में पैठा,
पुतला जला रहे।।
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है कोई बलसाली,
बुला ललकार के।
कितना भी बाण मार,
रावण न मरेगा।।
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रावण कभी मरा है,
जो आज मरेगा।
खुद को नहीं सुधारा,
तो आप जरेगा।।
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रावण परास्त होगा,
खुद को सुधार लो।
सभी बुराईयों को,
दिल से निकाल दो।।
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रावण नहीं गंवार,
सुन बात मान ले।
जो कह रहा हूँ मान,
जग को उबार ले।।
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जीना अगर तुम्हें हैं,
प्रेम लौ जला ले।
दुर्गुण की आहुति दे,
धरा को बचा ले।।

,,,,,,,,,,,,,अनिरुद्ध कुमार सिंह,
धनबाद, झारखंड।

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