वायु प्रदूषण (मुक्तक) - कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

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धूल उड़ रही है दिशा-दिशा में, कोई ध्यान नहीं रखता।
जो उपाय अपनाने सबको, उन पर ध्यान नहीं धरता।
गतिविधियाँ निर्माणों की सब, बेतरतीबी से नित होतीं,
फर्क नहीं पड़ता उन सब पर, कोई जीता या मरता।
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अपने अपने दायित्वों को, हमें समझना अब होगा।
जनता में अब पुनः जागरण, आज नहीं तो कब होगा?
थोड़ा थोड़ा यत्न करें सब, बात तभी बन पाएगी,
सार्थक यत्न करें जब  मिलकर, वायु प्रदूषण कम होगा।
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वायु संग जल भी जीवन का, आवश्यक आधार है।
इन दोनों के बिना न चलता, जीवन का व्यापार है।
गुणवत्ता दोनो की उत्तम, हमको रखना ही होगा,।
जब भी इन्हें प्रदूषित करते, होता बंटाधार है।
- कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा/उन्नाव, 0७ नवम्बर 202

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