परिस्थितियां - प्रतिभा कुमारी

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*जिंदगी के सारे शिकवे, इक पल में ही भूल गई.. 
जाने-अनजाने में मुझसे,जानें क्या-क्या भूल हुई..
*नफरतों की आड़ में ,हर कोशिश नाकाम रही ..
जिंदगी के सारे शिकवे, इक पल में ही भूल गई ..

*वादे -कसमें, रीति- रिवाजें, सारे दस्तूर टूट गए..
इक पल में ही सारे किस्से, कैसे चकनाचूर हुए..
*अग्नि के सात- फेरे, सातो वचन भी तोड़ गए..
तन्हाई के जंजीरों से , नाता हमनें जोड़ लिए..

*वो वक़्त के बदलते रिश्ते ,जानें कैसे छुट गए ..
जिंदगी के सारे किस्से, पलभर में ही लूट गए ..
वो वक़्त के परिंदे ,रिश्ते नहीं बदलते..
वक़्त बदले न बदले, पर दिल हैं बदलते..
जब लौटकर आओगे तुम,हम फिर वहीँ मिलेंगे..
ना कल कुछ बदला था ना आज भी बदलेंगे !" 
-प्रतिभा कुमारी-गया (बिहार)
 

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