दोहा - अनिरुद्ध कुमार

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कलम उकेरे भावना, सृजन बने संगीत।
काव्य शब्द के रूपमें, छेड़े मधुरिम गीत।१।

सृजनहार की कल्पना, काव्य लगे मनप्रीत।
कलमबद्ध हो गीत जब, बनजाता संगीत।२।

कलम काव्य रचना करे, शब्द शब्द गढ़ गीत।
सृजन भाव मनमोहनी, मधुर लगे संगीत।३।

कलम सृजन करता सदा, काव्य रचे बेजोड़।
गीत संगीत ताल लय, इसका नाहीं जोड़।४।

काव्य सृजन दिनरात हो, कलम लिखे नवगीत।
तान छिड़े बन कंठसे, सुंदर वह संगीत।५।
- अनिरुद्ध कुमार सिंह, धनबाद, झारखंड
 

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