सबका मालिक एक - हर्ष जैन सहर्ष

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कितने तारे टूट गये हैं फतवों से और नारों से, 
कोयल गाना छोड़ गयी क्या गीदड़ की हुंकारों से! 

ये नही चाहते फरमानी अब हर हर शंभू गान करे,
कट्टरपंथी सोच यही है फरमानी विष पान करे! 

सारा भारत फरमानी के साथ खड़ा है सुन लेना!,
तेरा फतवा नाज बहन के कदम पडा़ है सुन लेना!

भजन धार्मिक गाने से तौहीन तुम्हारी कैसे है,
शिव पूजा से दुनिया ये गमगीन तुम्हारी कैसे है! 

एपीजे अब्दुल कलाम थे भारत की आँखों के तारे,
अशफाकउल्ला और हमीद थे हमे  प्राणों से प्यारे! 

बहुत हो चुका आगे बढ़ कर कट्टरता को छोडो़ तुम,
दिल से दिल का रिश्ता पहले जैसा फिर से जोड़ो तुम! 

हसरत,फिराक,साहिर जैसों ने देखो कैसे गीत लिखे, 
नफरत कब लिख पाए वो जब जब भी लिखे तो प्रीत लिखे! 

हर हर शंभू गाने वाली नाज बहन की गलती क्या,
हाथ पे हाथ धरे रखने से उसकी रोटी चलती क्या! 

शिव की महिमा गाने से क्या पाप हुआ है ये बोलो! 

सबका मालिक एक तो क्यूँ संताप हुआ है ये बोलो!! 
- हर्ष जैन सहर्ष, दिल्ली
 

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