गजल - ऋतू गुलाटी 

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बाँहो मे तेरे, दिन प्यारे लगते हैं।
खामोशी मे  बोल तराने लगते हैं।

देखी है जब इन आँखो की मस्ती।
दिल को ये पागल बनाने लगते हैं।

मुस्काते हो तुम दिल खोल के जानम।
प्रीत  के किस्से  सुनाने  लगते हैं।

देखा तुमको सपनो मे जब से हमने।
तन्हाई  में होश  उड़ाने  लगते हैं।

ढूँढते थे तेरा पता दर बदर ये *ऋतु।
मिले हैं  जब से वो बेगाने लगते हैं।
- रीतू गुलाटी ऋतंभरा, मोहाली 
 

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