रंग दिखातें रहें - अनिरुद्ध कुमार

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प्यार तो प्यार है, दिल लगाते रहें।
जिंदगी ख्वाब है, नित सजाते रहें।

जीत है हार है,  रोज तकरार है।
राह ढ़ूंढ़े नया, जगमगाते रहें।

हौसला है जहां, राह कितनी वहाँ,
गुनगुनाते रहें, गीत गाते रहें।

रात दिन का समा, कौन किसका यहाँ, 
आप भी हैं यहाँ, मुस्कुराते रहें।

धूप है, छाँव है, रोज इक दाव है,
पाँव अपना यहाँ, बस बढ़ाते रहें।

देख सब हैं दुखी, ढूंढते हैं खुशी,
हर घड़ी सोंचते, ना गवांते रहें।

दूर हैं पास है, मिलन की आश है,
ख्वाब दिल में सजा, याद आतें रहें।

दर्द हैं मर्ज हैं, गर्म हैं सर्द है,
ये सभी कुदरती,सर झुकाते रहें।

नाज नखरें कई, बस यहीं जिंदगी,
'अनि' खुशियाँ सजा, रंग दिखातें रहें।
- अनिरुद्ध कुमार सिंह'अनि',धनबाद, झारखंड।
 

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