फूलों सा मुस्काते रहना- ऋतु गुलाटी 

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फूलों सा मुस्काते रहना,
सबको प्यार सिखाते रहना।

रखना ना मन मे तुम कुछ भी,
सुन्दर नगमे  गाते रहना।

छाया जग मे अब अध़ियारा,
अपना प्यार  दिखाते रहना।

बैठे सब गम के झूले में,
नैया पार कराते रहना।

जाना  इस जग से खाली है,
दौलत  ज्ञान  लुटाते रहना।

बातें  प्यारी करते रहना,
गम मे भी मुस्काते रहना।

क्या लाया था जब तू आया,
सबको ऋतु समझाते रहना।
- ऋतु गुलाटी ऋतंभरा, चंडीगढ़
 

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