तोरे नैना बड़े दगाबाज रे - अनुराधा पाण्डेय 

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क्या-क्या विद्या है पढ़ी क्या-क्या पाया ज्ञान।
कबिरा! फिर भी तुम रहे,मुझसे क्यों अनजान।।

कैसी पट्टी है पढ़ी, गए चुरा मन साथ।
प्रीत तिहाई बस दिए, छुड़ा लिए निज हाथ।।

तन से हो करके विमुख, मन ले जाना साथ।
कैसी पट्टी प्रीत की,निदय ! छुड़ाना हाथ।।

दिल पर रख कर तू बता, सच! तुझको है चैन?
सुधियाँ अब भी क्या तुझे, करती हैं  बेचैन।।
- अनुराधा पाण्डेय द्वारिका , दिल्ली 
 

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