देना माँ उपहार - अनिरुद्ध कुमार

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छठ महापर्व चरम पे, पूजा में बस ध्यान।
गाँव शहर में धूम है, महिमा बड़ी महान।।

उपासना में सब व्रती, करें घाट प्रस्थान।
सर पर डाला ले चलें, हाँथों में  सामान।।

आनंदित जीवन लगे, मधुर मनोहर गान।
घर बाहर मंगल रहे, मांग रहें वरदान।।

जल में ठारे हैं व्रती, माता का गुनगान।
सुर्य देव की अर्चना, तन-मन से सम्मान।।

भोर  से हीं व्रती खड़़े, लुटा रहे उदगार।
घर परिवार सुखी रहे, देना माँ उपहार।।
- अनिरुद्ध कुमार सिंह, धनबाद, झारखंड
 

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