जस्सोवाला इंटरमीडिएट कॉलेज में अध्यापक नियुक्ति को लेकर धांधली का आरोप

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utkarshexpress.com, देहरादून।  जस्सोवाला इंटरमीडिएट कॉलेज में अध्यापक नियुक्ति को लेकर धांधली का आरोप कॉलेज पर लगाया गया है। आरोप ये है कि 10 जनवरी  में बैक डेट का कार्य किया गया। अर्थात जिन लोगो को उनके पद पर तैनाती 10 जनवरी को दी जानी थी, उनको 8 जनवरी को 4 बजे आदर्श आचार संहिता लगने के बाद ज्वाइनिंग दी गई , जो नियम विरूद्ध है। ऐसा इसलिए कहा गया कि इनकी ज्वाइनिंग से पूर्व समूचे प्रदेश में चुनाव आयोग द्वारा आदर्श आचार संहिता लगा दी गई थी। शिक्षा विभाग की मिली भगत के कारण कॉलेज प्रशासन दवारा आनन-फानन में किस तरह से अपने चेहतों के स्थानांतरण किये गए ये किसी से छुपा हुआ नहीं है। 
इस सन्दर्भ में कॉलेज प्राचार्य का कहना है कि यह प्रक्रिया 8 जनवरी शनिवार को ही पूरी कर ली गई थी। 9 जनवरी को रविवार होने के कारण अध्यापक शनिवार को ही आ गए थे , इसलिए नियमानुसार उन्हें 8 जनवरी को ही ज्वाइनिंग देनी पड़ी। जस्सोवाला इण्टर कॉलेज के प्राचार्य विमल पाण्ड़ेय का कहना है की बैक डेट में ज्वाइनिंग की बात कहना गलत है। यहां एक मजेदार ये बात सामने आ रही है क़ि उन्होंने कहा की मैंने खुद 8 जनवरी को 12:30 बजे  विद्यालय में ज्वाइन किया , उसके लगभग 1 घंटे बाद सभी अध्यापक आये जिनको मैंने ज्वाइनिंग करा कर उनके कागज़ बनवाये । इस पूरे घटनाकर्म में कहंना ये है कि 8 जनवरी को 12:30 बजे प्राचार्य की ज्वाइनिंग, 8 जनवरी को 1:30 बजे अध्यापको की ज्वाइनिंग और 4 बजे समूचे प्रदेश में आदर्श आचार संहिता का लगना, एक जांच का विषय तो बनता है। 
कुछ लोगों का कहना है कि उस दिन कार्यभार ग्रहण करने वाला व्यक्ति कहाँ था , उसकी लोकेशन कहाँ थी , व्यक्ति वहाँ पहुंचा भी है या नहीं और ज्वाइनिंग हो गई। यानी जो लोग कार्यभार ग्रहण कर रहे थे उनकी लोकेशन जस्सोवाला में था या नहीं ये अवलोकनार्थ विषय है। अब एक यक्ष प्रश्न मुँह बाए खड़ा है कि निष्पक्ष जांच करेगा कौन ?
कॉलेज में तैनात एक सहायक व्यायाम अध्यापक (पीटीआई) ने आरोप लगाया कि ये कार्यभार ग्रहण कराना आदर्श आचार संहिता का खुला उलंघन है, और लोक्तन्त्र पर एक बड़ी चोट है क्यूंकि जस्सोवाला इण्टर कॉलेज में नियम विरुद्ध कई अध्यापकों को कार्यभार ग्रहण कराया गया। उन्होंने ये भी कहा कि इन लोगों की प्रक्रिया 8 जनवरी को 3 :30 बजे पूर्ण की गई जबकि 4 बजे उत्तराखंड में आदर्श आचार संहिता लग चुकी थी, नियमानुसार इनकी 10 जनवरी अर्थात आदर्श आचार संहिता के बाद ज्वाइनिंग होनी थी (जो नहीं हो सकती थी इसलिए इनकी ज्वाइनिंग 8 जनवरी को अनावश्यक नियम विरुद्ध दिखाई गई ) इसलिए  संदेहास्पद है । 

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