एक मुक्तक.= कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

एक मुक्तक.= कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

नहीं कमी है जजबातों की, उम्र नहीं आड़े आती।
माँ की ममता ही बच्चों को, सही भाव सिखला जाती।
जितना भी अपने बस में है, उतनी सेवा कर पाते।
मानवीय संबंधों की यह, अनुपम मोहक थाती है।
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रात पुनीत बड़ी मन भावन शंभु विवाह बड़ा शुभकारी।
पूजन भक्त करें दिन में भजनामृत धार बहे निशि सारी।
शैलसुता-शिव का गठबंधन दृश्य मनोहर और सुखारी।
मंगल हेतु प्रणाम करें मन से गिरिजापति भक्ति हमारी।
= कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा

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