सजी अयोध्या = डॉ रश्मि दुबे

सजी अयोध्या = डॉ रश्मि दुबे

आज रचा है राम लला ने, 
       स्वर्णिम यह अध्याय, 
नहीं मिलेगा आज विश्व में, 
       कहीं इस का पर्याय। 

राम राम के जयकारे से, 
        गूंजी दसों दिशाएं, 
चलो चलें हम आज खुशी के, 
       मिलकर दिए जलाएं।

नई वधू सी सजी अयोध्या, 
      विधि विधान से पूजन, 
अभिनंदन हम करें ईश का, 
         हर्षाता है जन मन। 

सरयू करती उमड़ घुमड़ कर, 
          बूंद बूंद से वंदन,
करता पर्यावरण राम का, 
       अमर पवन से चंदन। 

भाग जगे हैं जनमानस के,
       जो साक्षी इस क्षण के,
राम रहे हैं जन्मांतर से,
     प्रभु सदा कण कण के।  
= डॉ रश्मि दुबे, गाजियाबाद
 

Share this story