52 साल के फिल्मी सफर में अमिताभ बच्चन न थके न रुके : शंभू नाथ गौतम

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utkarshexpress.com - आज बॉलीवुड ही नहीं बल्कि भारत समेत दुनिया भर के करोड़ों प्रशंसकों के लिए खास दिन है। साथ ही भारतीय सिनेमा की 'यात्रा' इस सितारे के बिना अधूरी है। फिल्म इंडस्ट्रीज के एक ऐसे 'सुपर स्टार' जिन्होंने अपने कई नामों से पहचान बनाई। 'बिग बी, महानायक, एंग्री यंगमैन, और शहंशाह के नाम से भी जाना जाता है। अभिनेता के 52 सालों के लंबे फिल्मी सफर में कितने उतार-चढ़ाव आए लेकिन फिर भी बॉलीवुड में मजबूती के साथ 'डटे' हुए हैं। आज 11 अक्टूबर है। यह तारीख फिल्मी प्रशंसकों के लिए एक उत्सव से कम नहीं है। अब तो आप लोग जान गए होंगे, आज हम किस अभिनेता की बात कर रहे हैं। जी हां सही पहचाना आज चर्चा करेंगे सदी के महानायक और बॉलीवुड के सुपरस्टार अमिताभ बच्चन की।  अमिताभ की याद आते ही फिल्मी पर्दे पर निभाए गए उनके कितने किरदार याद आ जाते हैं। आज अमिताभ का जन्मदिवस है। सुबह से ही सोशल मीडिया पर करोड़ों प्रशंसक लोकप्रिय अभिनेता को बधाई संदेश भेज रहे हैं। भारतीय सिनेमा के इतिहास में 'युगपुरुष' का स्थान रखने वाले अमिताभ बच्चन आज 79 साल के हो गए हैं। इस आयु में भी एंग्री यंग मैन न थके हैं न रुके हैं बल्कि उसी जोश और ऊर्जा के साथ आज भी उनका फिल्मी सफर जारी है। फिल्म इंडस्ट्रीज में बिग बी ने जो मुकाम बनाया है वह आसान नहीं था। 70 के दशक में बुलंद इरादों के साथ मायानगरी पहुंचे अमिताभ को कई साल तक संघर्ष करना पड़ा। यहां तक उनका लंबे कद को निर्माता-निर्देशक ने रिजेक्ट कर दिया था। उनकी भारी भरकम आवाज की वजह से ऑल इंडिया रेडियो ने भी रिजेक्ट कर दिया था। करियर की शुरुआत में उन्हें लगातार 12 फ्लॉप फिल्में झेलनी पड़ी थीं। हालांकि, इसके बाद उन्होंने फिल्म 'जंजीर' से बॉलीवुड में अपनी अलग ही पहचान बना ली। लेकिन बाद में उनकी आवाज और लंबाई ही महानायक के लिए 'वरदान' साबित हुई। हिंदी सिनेमा को विश्व भर में पहचान दिलाने के लिए अमिताभ की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। आज महानायक के जन्मदिवस पर आइए उनकी निजी और लंबी फिल्मी पारी के बारे में जाना जाए। बता दें कि अमिताभ बच्चन का जन्म 11 अक्टूबर 1942 को इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश में सुप्रसिद्ध साहित्यकार और कवि डॉ हरिवंश राय बच्चन के घर  हुआ था। इनकी मां तेजी बच्चन कराची से थीं । शुरू में अमिताभ का नाम इंकलाब रखा गया था लेकिन बाद में साहित्यकार और कवि सुमित्रानंदन पंत ने इनका नाम 'अमिताभ' रखा।

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अमिताभ की शुरुआती पढ़ाई नैनीताल फिर दिल्ली में हुई। वह अपनी जिंदगी में एक्टर नहीं बल्कि इंजीनियर बनना चाहते थे, साथ ही एयरफोर्स में जाने का भी सपना था। पढ़ाई के बाद वह नौकरी करने के लिए कोलकाता (कलकत्ता) आ गए। लेकिन यहां उनका मन नहीं लगा और अपने सपने को सच करने के लिए साल 1967 में (बंबई) मुंबई पहुंच गए। फिर उन्होंने बॉलीवुड में स्थापित करने के लिए संघर्ष किया। मायानगरी में काफी समय तक ठोकरें खाते-खाते आखिरकार उन्हें पहली फिल्म 'सात हिंदुस्तानी' मिली जो 1969 में रिलीज हुई थी। यह फिल्म अमिताभ के लिए कोई खास फायदा नहीं कर सकी केवल उनकी पहचान बन गई। इस बीच उन्होंने कई फिल्मों में काम किया लेकिन सभी फ्लॉप गईं। अमिताभ के करियर की शुरुआत में फिल्म अभिनेता राजेश खन्ना का डंका बज रहा था। 1973 ऐसा साल था जो महानायक को 'बुलंदियों' पर ले गया। इसी साल डायरेक्टर प्रकाश मेहरा निर्देशित फिल्म ‘जंजीर’ में पुलिस इंस्पेक्टर की उनकी भूमिका ने उन्हें ‘एंग्री यंगमैन’ बना दिया । इस फिल्म के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार नए कीर्तिमान स्थापित करते गए। देखते ही देखते अमिताभ बॉलीवुड के 'शहंशाह' बन गए। 'लाखों-करोड़ों प्रशंसकों को भी एक ऐसा अभिनेता मिल गया जिसकी वह तलाश कर रहे थे'। उसके बाद फिल्मी पर्दे पर अमिताभ की दीवानगी सर चढ़कर बोलने लगी। यश चोपड़ा निर्देशित 'दीवार' और जेपी सिप्पी निर्देशित 'शोले' फिल्म ने उन्हें एक महान अभिनेता के तौर पर गढ़ दिया। उसके बाद डॉन, मुकद्दर का सिकंदर, अमर अकबर एंथोनी, कालिया, सिलसिला, शराबी, कुली, शहंशाह, और अग्निपथ, खुदा गवाह फिल्मों ने ही अमिताभ बच्चन को सदी का महानायक बना दिया। अमिताभ की फिल्मों की सबसे बड़ी खासियत उनके डायलॉग थे। ये ऐसे होते हैं कि तुरंत दर्शकों और प्रशंसकों की जुबान पर चढ़ जाते। कई डायलॉग तो हमारी जीवनशैली का ही हिस्सा बन चुके हैं। बता दें कि वर्ष 1982 में 'कुली' फिल्म की शूटिंग के दौरान गंभीर रूप से घायल हुए अपने चहेते अभिनेता अमिताभ की सलामती के लिए पूरा देश प्रार्थना कर रहा था। आखिरकार प्रशंसकों की दुआ रंग लाई अभिताभ एक बार फिर फिल्मी पर्दे पर उसी जोश के साथ लौट आए । 

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