नयी सदी का भारत है - अनिरुद्ध कुमार 

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तीनों बंदर देख रहें, सबको मिली महारत है।
आजादी परवान चढ़ी, बापू का यह भारत है।।

सही गलत मेंं द्वंद सदा, करते सभी तिजारत है।
झूठा सच  को पढ़ाता, कहता भाग्य सुधारत है।।

महँगाई आज चरम पर, झोला माल निहारत है।
गली गली चितकार मची, जनता दाँत चियारत है।।

अपराध माथ चढ़ बोले, गली गली फुफकारत है।
सुशासन का हो जयकार, अहंकार दिल जारत है।।

भेदभाव अब हरी भरी, काबिल बैठ निहारत है।
जातपात की हवा गरम, नेता ज्ञान बघारत है।।

बाहुबली नये रूप में, देख आज ललकारत है।
प्रजातंत्र हर्षित दिखे, नयी सदी का भारत है।।
- अनिरुद्ध कुमार सिंह, धनबाद, झारखंड 
 

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