अनमोल वचन = समर मल्ल

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दौलत ऐसी मोह है जो ना छोडत कोई, 
जो दौलत से छूटे मोह ,तो दुःख काहे होई । 

धन दौलत से जो खोजे खुशी, वो ना ख़ुशी पाई  ,
जो दिल में ढूंढें खुशी, वो हर लम्हा मुस्कुराई।

समाज लोग सब दिखावे हैं ये ना समझत कोई,
गर अपने पास कुछ होय ना, गैर ना पूछत कोई।

घमण्ड, अहंकार हर कोई ढोए, प्रेम ना ढोवत कोई,
प्रेम में ही दुनिया बसती, ये ना जानत कोई।

जाति धर्म सब छलवे हैं, ये जानत है सब कोई,
फिर भी इंसानियत भूल कर, जाति धर्म ही ढोएत हर कोई।

प्रेम ही दुनिया प्रेम ही दौलत प्रेम है करत हर कोई,
फिर भी प्रेम से जाने क्यों नफरत करत हर कोई।
 
प्रेम ऐसी मोह है जिसमे लूटत हर कोई,
जीतना ही लूट जाए उतना ही अमीर होई।

प्रेम ऐसी शक्ति है जिसे हरा ना पाए कोई,
प्रेम में ही राधा कृष्ण बसते हैं ये जानत हर कोई।
= समर मल्ल, कुशीनगर, उत्तरप्रदेश
 

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