आशुतोष सत्-सत् वंदन  - कलिका प्रसाद

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इस सावन के  पवित्र माह में,
आशुतोष   की   पूजा  होती,
भोले बाबा को जो जलाभिषेक करे,
उसकी मन कामनाएँ पूरी होती।

विल्वपत्र है अति प्रिय उनको,
इसमें  विष  हरण के  गुण है,
केदारेश्वर को जो विल्व चढाता,
मन वांछित फल पा जाता है।

अर्ध चन्द्र मस्तक पर शोभित,
सिर   पर  गंगा  धारण  है,
कष्ट हरण दु:ख नाशक शंकर,
तुमको   कोटि-कोटि  वंदन है।

बाबा तुम रक्षक हो भक्तों के
तुम्हारी   कृपा   निराली   है,
भोले  तुम देवों में महादेव हो, 
दिव्य   हिमालय   में  रहते हो।
- कालिका प्रसाद सेमवाल
मानस सदन अपर बाजार, रुद्रप्रयाग
 

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