दूर मंज़िल है= शिवम यादव

दूर मंज़िल है= शिवम यादव

तुझे लड़ना ही नहीं,
बस लड़ते ही जाना है,  
ये जिंदगी के कदम हैं, 
बस चलते ही जाना है। 
दूर खड़ी मन्ज़िल, 
पुकारती होगी तुम्हें, 
तुम्हें बस हँसकर उसके,
गले लग जाना है। 
दर-दर पर मिली ठोकरें, 
तुम्हें सिखाती जाएँगी, 
हर ठोकर से तुम्हें, 
कुछ न कुछ सीखते ही जाना है।  
गैरों को देखकर चलोगे, 
तो कुछ मुश्किल होंगी मन्ज़िलें, 
तुम्हें बस अपने ही धुन के,
 रागों को गाते जाना है। 
= शिवम यादव "अन्तापुरिया"
कानपुर उत्तर प्रदेश

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