व्यवहार  = डॉ रश्मि दुबे 

व्यवहार = डॉ रश्मि दुबे

राग द्वेष न हो कभी , सत्य सरल व्यवहार ।
दूर करो मानव सभी, दूषित कटू विचार  ।।

निर्विकार हो प्रेम तब, मिले सभी अधिकार । 
सीधा  सत्य  प्रेम  सदा , होता  न व्यापार ।।

प्रेम हो सभी रिश्तों का, केवल एक आधार ।
करे ना कोई प्रेम का, कही कभी कारोबार ।।

निज कर्मों का तुम सदा, करके पुनर्विचार ।
दुर्गुणों का कर सकते, स्वयं नित्य उपचार ।।

दूर रखोगे जीवन से, जो सारे व्यभिचार ।
संस्कार को अपना कर , ही होगा उद्धार ।।
= डॉ रश्मि दुबे , गाजियाबाद
 

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