भाई-बहन का प्यार - इन्द्रसेन यादव

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राखी है अनमोल,

इसका मोल कहाँ चुक पाता है ,

भाई बहन के प्यार से बढ़कर,

इस दुनियाँ में कहाँ कोई नाता है।

नि:स्वार्थ प्रेम की मूरत,

ये सारी बहने होती हैं..

हो तनिक दर्द जो भाई को..

ये फूट-फूट कर रोती हैं।

दिन रात दुआयें भाई हित में

ये नित्य ही करती रहती हैं

चाहे हो खुद कितना विपन्न

पर भाई के सम्पन्न की कामना करती हैं ।

चाहे हर एक क्षेत्र में हम,

बिल्कुल जीरो होते हैं,

पर हर बहनों की नज़रों में,

उसके भाई हीरो होते हैं।

दिल से कहूँ तो ईश्वर का,

वरदान ये बहने होती हैं..

ममता और स्नेह की सचमुच,

खान ये बहने होती हैं।

- इन्द्रसेन यादव 'इंदर'

प्रवक्ता, एस.बी.बी.ए.इंटर कालेज, सहारनपुर

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