छंद - (गरीब की दीवाली) - जसवीर सिंह हलधर 

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दीवाली की रेल पेल ,सड़कों पे लगी सेल ,
सारा इंतजाम फेल , आज मेरे दून का ।

चीन के पटाखे रखे , लड़ियाँ धमाके रखे ,
उठता जनाजा दिखे , देश के कानून का ।।

बूढ़ी टोकरे को लिए , संग छोकरे को लिए ,
बेचने आयी है दीये , घूट भरे खून का ।

जोर से देती आवाज ,घर में नही अनाज ,
कैसे हो जुगाड़ आज , दाल भात चून का ।।
 - जसवीर सिंह हलधर , देहरादून 
 

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