कोरोना = अशोक गुलशन 

कोरोना = अशोक गुलशन

कोरोना का रूप हुआ विकराल,
राम अब आ जाओ।
लंकापति संहारक दशरथ लाल,
राम अब आ जाओ।।

मुँह को ढककर यहाँ सभी हैं,
जीने को लाचार।
स्वजन- स्वजन के साथ कर रहा,
दुर्जन सा व्यवहार।
हुआ सभी का हाल बहुत बदहाल,
राम अब आ जाओ।।

बिछुड़े माता-पिता किसी के,
बिछुड़े भाई-बन्धु।
आँख-आँख से आँसू छलके,
भरने को घट-सिन्धु।
ऐसे में अब जीना हुआ मुहाल,
राम अब आ जाओ।।

कभी न देखा गया आज तक,
ऐसा संकट काल।
जिसको देखो वही आज है,
त्रस्त और बेहाल।
आओ आकर सबको करो निहाल,
राम अब आ जाओ।।
--- अशोक "गुलशन", बहराइच (उत्तर प्रदेश)
 

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