कुंआ म मोला तय ढकेल दिए वो = दशवंत सिंह धुर्वे

कुंआ म मोला तय ढकेल दिए वो = दशवंत सिंह धुर्वे

ये वो मन मोहिनी मोर ये वो सविता!
बीच मजधार म काबर टोरे पीरित ला!!

गंगरेल बांधा म डोंगा बोर दिए वो!
कुंआ म मोला तय ढकेल दिए वो!!

तोर मया म बइहा बनगेंव घुमेंव जंगल खार!
एक बार तय मिले सविता मिले नही दू बार!
या का होगे तोला ! काकर बुध म छोंडे मोला!
आधा रस्दा म मोला छोंड दिए वो!
गंगरेल बांधा म डोंगा बोर दिए वो!
कुंआ म मोला तय ढकेल दिए वो!!

बडे घर के राजकुमारी मै गरीब के बेटा हंव!
तय महल के रानी मय गांव के गोट्कर्रा हंव!
करूहा करेला चानी ! जहर देके पियाए रानी!
काबर तय तरसाए रानी मया ल टोर दिए वो!
गंगरेल बांधा म डोंगा बोर दिए वो!
कुंआ म मोला तय ढकेल दिए वो!!

मोर मया ल खेल समझ के दगा दिए तय मोला!
पथरा फूटे कस छाती फूटे नई बांचय मोर चोला!
हवंव धुर्वे  मय हा साऊ सिधवा !
मया पीरित के गावंवव गीत ला!
मोर मया के जामत बिरवा ल टोर दिए वो!
बीच तरिया म डोंगा बोर दिए वो!
कुंआ म मोला तय ढकेल दिए वो!
गंगरेल बांधा म डोंगा बोर दिए वो!!
=  दशवंत सिंह धुर्वे, रायपुर, छत्तीसगढ
 

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