एक पशु की अभिलाषा = ओनिका सेतिया

एक पशु की अभिलाषा = ओनिका सेतिया

हम बेजुबान नहीं बता सकते दर्द अपना ,
हमारे दर्द से कुछ तो रखो तुम संवेदना ।
हम नहीं मांगते तुमसे तुम्हारी मलकियत ,
सिर्फ एक रोटी अपने दर पर हमें दे देना ।
हमारे गम , खुशी से भले न रखो वास्ता,
मगर अपनी खुशी में हमें ना समझे खिलौना।
तुम अपने सभी त्योहार मनाओ साआनंद ,
मगर अपनी मस्ती में मानवता को न भूलना ।
हम में भी है प्राण,रक्त ,एक सम्पूर्ण जीवन ,
और तुम जैसे ही ईश्वर की एक संरचना ।
हम पशुओं की  नहीं होती बेशुमार चाहते ,
बस एक ही चाहत  की हमें जीव समझना ।
= ओनिका सेतिया, फरीदाबाद

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