देव दिवाली एवं कार्तिक पूर्णिमा - कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

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देव दिवाली, 
बड़ी निराली
भरें देवगण
झोली खाली।

निद्रा त्यागें
श्री हरि जागें
भक्त सुखी हों
आशिष माँगें।

तुलसी पूजन
प्रभु का वंदन
भोग लगा सब
करते अर्पण।

उत्सव फिर से
पर संयम से
रहें सुरक्षित
सब कोविड से।

द्वार पधारो
कष्ट निवारो
सबको दुख से
सदा उबारो।

दीपक जलते
हर तम हरते
जग आलोकित
मंगल करते।
- कर्नल प्रवीण त्रिपाठी नोएडा/उन्नाव, उत्तर प्रदेश 
 

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