डिजिटल इश्क या अनकहे अहसास = कामेश

डिजिटल इश्क या अनकहे अहसास = कामेश

तेरा बार बार मुझे ऑनलाइन देखना भी इश्क है,
देख के मेरी डी पी बार बार और उस पर मुस्कुराना  भी तेरा इश्क है ।

मेरे स्टेटस पर सबसे पहला  तेरा कमेंट करना भी इश्क है,
भीड़ से उठ कर ग्रुप में सबसे पहले  मेरी पोस्ट पर, तेरा जवाब आना भी इश्क है।

बिन मिले मुझसे मेरी पोस्ट्स में खो जाना भी तो इश्क है,
मेरा ऑनलाइन आते ही तेरा ऑफलाइन होकर फिर थोड़ी देर बाद आना भी इश्क है।

इंस्टा पर लव वाला तेरा लाइक भी तो इश्क है,
रोज डीपी बदल कर मेरे कमेंट का,  इंतजार भी तेरा इश्क है।

पहली कॉल में तेरा सेल उठा लेना भी इश्क है,
फेसबुक पर सबसे पहला लाइक फिर उस पर कमेंट भी तो इश्क है।

मेरी स्टोरी पर तेरा मुस्कुराता हुआ इमोजी भी इश्क है,
कैसे कहूँ और क्या क्या गिनाऊ।

तेरा व्हाट्सएप्प पर ऑनलाइन आते ही मेरा पोस्ट ग्रुप में , 
ढूंढ कर सैंकड़ों मैसेज में ढूंढ कर पढ़ लेना भी तेरा इश्क है।

और सुन ये भी सच है तेरा इस पोस्ट को पढ़कर हौले से मुस्कुराना भी तेरा ही इश्क है,
फिर कमेंट कर मेरे रिप्लाई का इंतजार करना भी इश्क है।

इस इश्क को डिजिटल कहूँ या बिन मिले तेरे अहसास कहूँ,
या तुम्हारे मेरे लिए जज्बात कहूँ बस कह ही देता हूँ।
तुझे दूर रहते हुए भी मुझे पास महसूस कर लेना भी, और कुछ नही तेरा ही इश्क है।
= कामेश की कलम से, जयपुर , राजस्थान
 

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