दोहा - अनिरुद्ध कुमार

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सुबह-सुबह ना कीजिए, कोई ऐसा काम।
व्याकुलता मन की बढ़े, जीना हो हलकान।।

बिस्तर से उठ के जपे, निसदिन सीता राम।
हंथेली को जोड़ के , प्रभु को करें प्रणाम।।

जीवन के बस चारदिन, क्या करना आराम।
जासे जितना हो सके, सुमिरे नित हरि नाम।
- अनिरुद्ध कुमार सिंह, धनबाद, झारखंड
 

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