दोहा =  कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

दोहा = कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

हे  बजरंगी  दीजिये,  सब को ऐसी शक्ति।
सरस भाव उपजें हृदय, बढ़ती जाए भक्ति।।1

मंगलमय मंगल दिवस, करते मंगलमूर्ति।
मंगल को हनुमत भजें, होगी इच्छापूर्ति।।2

संजीवनी सम नाम है, तन में आती जान।
शरणागत के कष्ट सब, हरते श्री हनुमान।।3

अपने पौरुष को अगर, पहचानें सब लोग।
हो जाएंगे तब सफल, जो भी करें प्रयोग।।4

रख हाथों में हाथ को, कभी न होता कार्य।
वांछित फल यदि चाहिये, कर्मठता अनिवार्य।।5

मत आंके यूं सफलता, क्या उसका परिमाण।
जग करता खुद आकलन, देना नहीं प्रमाण।।6

कम करके मत आंकिये, सब हैं कार्य समान।
रख कर छोटे पग तभी, बनता व्यक्ति महान।।7

दहशत का फैला तिमिर, हनुमत करिये नाश।
अपने प्रखर प्रताप से, जग में करें प्रकाश।।8

अंधकार कुविचार का, बाला करिये दूर।
धरती पर सुख शांति हो, खुशियाँ हों भरपूर।।9

बजरंगी का ध्यान धर, शुरू करें निज काम।
जब तक लक्ष्य न प्राप्त हो, नहीं करें विश्राम।।10
= कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा/उन्नाव
 

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