दोहा = डा० नीलिमा मिश्रा

दोहा = डा० नीलिमा मिश्रा


बंद करो सब रैलियाँ, मुश्किल में इंसान।
कोरोना के दंश से, कयों हैं सब अनजान।।

दूजी आई जो लहर , वो है काल समान।
बच्चे बूढ़े औ युवा, सबकी लेगी जान।।

घर में रह कर ही करें , पूजा अर्चन ध्यान।
निर्मल मन जिसका सरल, उसे मिलें भगवान ।।

मास्क लगाने का चलन, भूल गया इंसान।
हाय- हाय फिर क्यों करे, ऐ मूरख नादान।।

सत्ता की चाहत जिसे,उसको बहुत गुमान।
झूठे वादे कर रहा, बगुला भगत समान।।

हाट दुकानें बंद हैं ,नगर हुए सुनसान।
मरघट जैसा हो गया, हर घर है श्मशान।

लोकतंत्र की बलि चढ़ा, भारत देश महान।
तांडव मचा चुनाव का , रुका नही तूफान।।

मानवता का ही नही ,रहा किसी को भान।
गर्वित होता है मनुज, कर सबका अपमान।।

कैसा समय दिखा रहे ,हम सबको भगवान ।
अर्थी को काँधा नही, दे पाए इंसान।।
१०
दिन-दिन छिनती जा रही, चेहरे से मुस्कान।
माता रानी दीजिए , सब भक्तों को ज्ञान।।
= डा० नीलिमा मिश्रा, प्रयागराज

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