दोहा गजल = अनिरुद्ध

दोहा गजल = अनिरुद्ध

बालम बिन सूनी गली, घर-आंगन,परिवेश,

हमको छोड़ चले गये, राजा जी परदेश।

 

बिखरे मोती प्यार के, दिल में पीर अथाह,

आँखों से आँसू झरे, बिचलित मन में क्लेश।

किसे आज अपना कहें, कौन करे परवाह,

काटे ना अब पल कटे, बाट लगी संदेश।

रात दिन चिंतित हिया, कैसे हो निर्वाह,

पग पग पर बैरी खड़े, अनहोनी अंदेश।

बंधन कैसा प्रेम का, अविरल नीर प्रवाह,

जागे सोये दिल कहे, जा बैठें कैलाश।

भूख प्यास इच्छा मरी, मुखसे निकसे आह,

रात दिन यही सोंचती, प्यारा बाबुल देश।

दुविधा अनि को खारहा, कोई निकले राह,

चिंता मन की दूर हो, दया करना महेश।

= अनिरुद्ध कुमार सिंह, धनबाद, झारखंड।

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