दोहा छंद = अनिरुद्ध कुमार

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कैसी रचना प्रकृति की , बहुयामी है रूप।
जीवन पाये परवरिश, छांया हो या धूप।।

धरती जीवन दायनी, इसके बहु आयाम।
कितनी ये सुखदायिनी, पाते सब आराम।।

प्राणवायु का श्रोत वृक्ष, बहुविधि आवे काम।
जीवन रक्षक फूल,फल, लकड़ी का भी दाम।।
= अनिरुद्ध कुमार सिंह, धनबाद, झारखंड।
 

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