रिमझिम बारिश की बूंदे = पूनम शर्मा स्नेहिल

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है मुझको भाती ये रिमझिम ,
मन को हर्षाती ये रिमझिम।
भीगूं उसकी बूंदों से जब मैं,
उस पल मुस्काती ये रिमझिम।

पड़ती जिस पर भी उसको ,
स्वच्छ कर जाती ये रिमझिम।
रूप उसका वास्तविक सा ,
उस पल दर्शाती ये रिमझिम ।

काली घटाओं संग उमड़े से ,
बादल लाती ये रिमझिम ।
दे स्पर्श शीतल सा उस पल ,
दिल को छू जाती ये रिमझिम।

टिप टिप बूंदो की ध्वनि से,
कोई राग सुनाती ये रिमझिम।
मधुर से उन स्वरों से ,
दिल खुश कर जाती ये रिमझिम।

बैठ घरों में कभी भी मुझको ,
न भाती है ये रिमझिम ।
बूंदों की टिप-टिप से अक्सर ,
पास बुलाती है रिमझिम ।।

= पूनम शर्मा स्नेहिल, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश 
 

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