खाली फ्रेम = मोनिका जैन

खाली फ्रेम = मोनिका जैन

आज ये खाली फ्रेम इतना बंजर सा क्यूँ लग रहा है,
डर की गहमा-गहमी से अपनी जगह से हिलता क्यो महसूस  हो रहा है,
हर बार की तरह पहले से ही चित्र का स्थान निश्चित  होता था,
पर जाने क्यू आज कोई  भी आगे आने को तैयार नही,
सारी खुशियाँ सारी हँसी सारे जज्बात  और सारे ही एहसास, 
एक कोने मे दुबके बैठे है और कनखियो से एक दूसरे को देख रहे है,
कितना खतरनाक समय है सारे रस खौफ मे बदल गये है,
खुश रहने की प्रवृति खोखली हो चुकी है,
जाने कौन सा पल आज कौन सी अनचाही खबर लेके आता है,
खाली फ्रेम .का अनचाह हिस्सा.अचानक से बनके रह जाता है श्रद्धांजली, 
 = मोनिका जैन , दिल्ली

Share this story