पर्यावरण दिवस = झरना माथुर

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पल-पल तू पेड़ काटे कैसे सुख पायेगा,
जानकर करे हत्या कैसे सुकून पायेगा।

घर के द्वारे पेड़ लगा था जो तूने कटवाया,
सावन में झूले कैसे झूला कैसे मस्ती पायेगा।

जंगल काटे,उपवन काटे और बना दी कॉलोनिया,
प्रदूषण को तूने बढ़ाया कैसे आक्सीजन पायेगा।

पेड़ हमको फल-फूल देते और देते खुशियाँ,
सब मिलकर पेड़ लगाओ तू हरियाली पायेगा।

पांच जून को हम सब मिलकर यह शपथ लेते है,
पर्यावरण दिवस मनाकर  मह्त्व जान पायेगा।
= झरना माथुर, देहरादून 
 

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