आँखें = किरण मिश्रा 

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मचलती जाम हैं आँखे,
कहाँ  ये आम हैं आँखें !!

तुम्हारे हुस्न की परचम ,
सुरमई  शाम  हैं आँखें !!

हमारा  दिल  चुराया है ,
देती इल्ज़ाम हैं आखें !!

पढ़ाती मन  की  गहराई ,
इश्किया इनाम हैं आँखें  !!

सदायें इश्क़ की  सदियों,
मुखबिरी बनाम हैं आँखें!! 

कहें होंठो की मस्ती सब ,
मीठू  किमाम  हैं  आँखें !!

बताती दिल की बातें सुन ,
कर दी तुम्हारे नाम हैं आँखें  !!

किरण मिश्रा"स्वयंसिद्धा", नोएडा
 

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