फागुन = मीनू कंवर 

फागुन = मीनू कंवर

फागुन का महीना आया रंग रसिया,

उमंग जागृत हुआ मन बसिया।

धरती सोना उगल रही मानो,

चमक रही पकी गेहूं की बालियां।

कोयल, मोर, पपीहा बोले,

पंचम स्वर में मैना बोले,

प्रीत रंग की ओढ़ चुनरिया।

सरसर हवा सरक रही,

फागुन मास बड़ा अलबेला,

जित देखूं तित मन का मेला।

होली खेले मतवाले,

भूल गए सब बैर पुराने।

सत्य असत्य का खेल निराला,

कर होलिका दहन

प्रहलाद को हरि ने उभारा।

= मीनू कंवर, जयपुर, राजस्थान

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