विदाई = पूनम सिंह

विदाई = पूनम सिंह

बेटी की  विदाई पर हर बाप क्यों रोता है,
क्या बेटी के दूर जाने के गम से,
या बेटी की असुरक्षा को लेकर, 
हर पल है उसे बेटी का दर्द सताता,
क्यों दहेज देने पर भी चिंता बनी रही  
क्या बेटी की कीमत चंद रुपयों में है सिमटी 
बेटी क्या कोई दान की वस्तु है, 
जिसे हर किसी को दान में चाहिए,
एक बाप बेटी के जन्म से लेकर, 
विदाई तक कितने अरमान पालता है,
चंद रुपयों की खातिर उसकी बेटी,
कर दी जाती है अग्नि में प्रज्वलित,
कितना कष्ट सहता होगा बाप, 
किसी को ना दिखता उसका दर्द,
हाय! ना जाने कब जाएगा यह दहेज रूपी दानव,
फूल जैसी बेटियों को जा रहा है निगल ।।
= पूनम सिंह, प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)

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