कृपा का फूल = जया भराड़े बड़ोदकर 

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इंसानियत है धर्म,
ईमानदारी है पूजा,
क्या ईश्वर क्या अल्लाह,
कृपा से बढ़कर कोई नहीं है दूजा।
धर्म और जात पात की,
छोड़ दो ये लड़ाई,
प्रेम दया करुणा का,
पाठ कर लो मेरे भाई,
डॉक्टर  के चरणो में,
देखा है मैने ईश्वर,
करे जो सेवा तन मन से,
वही है ईश्वर से भी ऊपर। 
मैने मंदिरों में पूजा,
दीया बहुत जलाया,
वो मंदिरो का ईश्वर,
किसी काम न आया,
फूल मगर कृपा के,
डॉक्टर ने ही बरसाया,
सभी कोरोना योद्धाओं ,
को दिल से सलाम।
= जया भरादे बड़ोड़कर, नवी मुंबई

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