गीत (फगुनाए हैं टेसू,गुलहड़) = डा० नीलिमा मिश्रा 

गीत (फगुनाए हैं टेसू,गुलहड़) = डा० नीलिमा मिश्रा

फगुनाए हैं टेसू-गुलहड़ , सेमल गाती गीत सुहाना ।
सरसों कवितावली सुनाए , आम्रकुंज देखो बौराना ।।

होली का मौसम अलबेला ,भंग घुल गयी है साँसों मे ।
मंत्रमुग्ध करती कोयलिया ,कुहुक सुनाती मधुमासों में ।।
सरसी छंद लगे गुलमोहर ,रोला गाए बेर दिवाना ।
फगुनाए हैं टेसू गुलहड़ ,सेमल गाती गीत सुहाना ।।

भोर सुनहरी किरणों के रथ ,पर चढ़कर धीरे आती है ।
महुआरी की धरा महकते ,फूलों से तब भर जाती है।।
भँवरा कलियों का चुम्बन कर ,बागों में डोले मस्ताना ।
फगुनाए है टेसू गुलहड़ , सेमल गाती गीत सुहाना ।।

गिरि-कानन,पावन मनभावन,सकल सृष्टि लगती मतवाली।
बेलपत्र पीपल बरगद कैथा, इमली की छटा निराली ।।
प्रेम पत्र लिखने बैठी है ,चंपा लिखती साजन आना ।
फगुनाए हैं टेसू गुलहड़, सेमल गाती गीत सुहाना ।।

कांलिदी तट, मधुवन, उपवन, कुंजगली महकी अँगनाई।
कबिरा गाए आँगन,चौखट मुरली बजी-बजी शहनाई ।।
श्याम रंग मे रंगा हुआ है ,गोकुल, वृंदावन ,बरसाना ।
फगुनाए है टेसू गुलहड़ ,सेमल गाती गीत सुहाना ।।

= डा० नीलिमा मिश्रा , प्रयागराज
 

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