गीत = डा० नीलिमा मिश्रा

गीत = डा० नीलिमा मिश्रा

प्रभु दर्शन की प्यासी अँखियाँ,
व्याकुल आठों याम ।
चित्रकूट का कण-कण बोले 
जपो राम का नाम ।।
तुलसी मन चंदन को घिसते 
देख रहें हैं बाट।
मस्तक पर चंदन को धारें 
रघुकुल भूषण राम ।।
प्रभु दर्शन की प्यासी अँखियाँ ——

राम नाम बस नाम नही है ,
राम एक विश्वास ।
भक्तों के संकट को हरता 
पूरण करता आस ।।
सानुज सीय समेत विराजो 
मन मंदिर हे ! नाथ 
ह्रदय हिलोर उठे सरजू की 
बनूँ अवध का धाम।।
प्रभु दर्शन की प्यासी अँखियाँ ———

नील सरोरुह से भी कोमल 
अकथनीय है रूप ।
वचन अगोचर बुद्धि तुम्हारी 
नीलम कहे अनूप ।।
उपमाएँ सब लजा रहीं हैं 
क्या मैं दूँ उपमान।।
शोभा बरनि न पाए तिहारी 
तुलसी लखि अभिराम ।।
प्रभु दर्शन की प्यासी अँखियाँ ——

प्राणनाथ तुम बिन इस जग में 
सुख की कहीं न छाँव ।
पिय वियोग में रोए विरहन 
सूना लागे गाँव ।।
ब्रह्म जीव बिच माया बैठी 
मोह बढ़े दिन-रात ।
सूर्य वंश के कुल दीपक तुम 
करो मुझे निष्काम ।।
प्रभु दर्शन की प्यासी अँखियाँ ——-

आप्तग्रंथ सारे कहते हैं 
विग्रह प्रभु के चार ।
लीला,धाम, रूप अरू नामा 
जपिये बारम्बार ।।
इस कराल कलियुग में भक्तों,
राम नाम आधार ।
उल्टा सीधा जैसा जप ले 
मिले मुक्ति अविराम  ।।
प्रभु दर्शन की प्यासी अँखियाँ ,
व्याकुल आठों याम ।
= डा० नीलिमा मिश्रा,प्रयागराज
 

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