गीत = डा० नीलिमा मिश्रा

गीत = डा० नीलिमा मिश्रा

शहीदों की विरासत को हमें पूरा बचाना है ,
हमें अपने वतन की आन पर सब कुछ लुटाना है ।

फ़िदा जो कर गये हैं जानो तन इस देश की ख़ातिर ,
शहीदों की मज़ारों पर चिराग़ों को जलाना है ।।

अमन हो चैन हर दिल में नही होवे कहीं दंगा ,
दिलों से फूँक दो  नफ़रत  बहाओ प्रेम की गंगा ,
उसी गंगा की धारा में हमें मिलकर नहाना है ।
शहीदों की विरासत ————-

परायी पीर से भीगे नयन मोती बरसने दो,
सजा कर माँग में तारे दुल्हनियाँ को सँवरने दो 
हथेली पर हथेली रख के माला को बनाना है।
शहीदों की विरासत ———-

न हो गंगा कोई मैली न हो दहशत की अब खेती ,
ज़मीं दोआब के जैसी हो दोमट न कहीं रेती ।
चमन से खार नफ़रत के हटाकर गुल खिलाना है ।
शहीदों की विरासत को ——-

हुआ आजाद हिन्दुस्तान  की क़ीमत चुकाई है ,
कोई अश्फ़ाक उल्ला है कोई सुखदेव भाई है ।
भगतसिंह की शहादत का वही क़िस्सा सुनाना है ।
शहीदों की विरासत ———

चली आज़ाद की गोली फिरंगी लड़खड़ाये थे।
दगा कर कनपटी पर  गोलियाँ वो मुस्कुराये थे ।
हमें भारत में वंदे मातरम का गीत गाना है ।
शहीदों की विरासत ———-
= डा० नीलिमा मिश्रा, प्रयागराज
 

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