गीत - झरना माथुर

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चूड़ी बोले मेरा कंगना बोले, सजना आने वाले है,
सज सँवर  के मै शर्माऊ, दर्पण से घबराऊँ  मैं।

अब के साजन आयेंगे उनसे ना मिलूँगी ,
जितना मुझें सताया है मैं रूठ के यूँ बैठुँगी ,
पर जब भी वो सामने आये खुद को रोक ना पाऊँ ।
दर्पण से घबराऊँ मैं।

चुनरी  ओड के आऊंगी मैं घूँघट ना खोलूंगी ,
मन ही मन घबराऊँ  मै उनसे ना बोलूंगी,
चंदा तू भी साथ निभाना बादल में छिप जाना रे।
दर्पण से घबराऊँ मैं।
- झरना माथुर, देहरादून
 

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