गीत = शालिनी सिंह

गीत = शालिनी सिंह

अमवां कै पेड़वा पर कूंकेली कोयलियां।
भएं भिनसरवां न आये मोरे रसिया।।
हुंकुर-हुंकुर करैं मनवा कै देहरी।
उठिहै जौ अंधियां तौ छांवैं कौन ठठरी।।
अमवां--------
पिया मोरे  गइले जबसे सवनवा मां।
फागुन भी बीता सखि, बीता रे होलिया।।
जाने कौन पिय का मोरे भाईल गुजरियां।
भूल गयें  मोहे पिया निर्मोहिया।।
अमवां----------
काली- काली घिरि- घिरि आवेली बदरियां।
जियरा मा भय मोर जगावेली बदरियां।।
भड़-भड़ करें ला हाय रे पवनवां।
एक खन सांस, दूंजे क्षण सूखें रें परनवा।।
अमवां----------
अमवा और नेबुवा में रस नियराईल।
निहुरिं- निहुर बिरूवा लेई अंगड़ाई।।
कांत तूं आवों मोरों जीवन तारो।
कठिन विक्षोह पिऊं ऐसे न मारों।।
अमवां---------
= शालिनी सिंह,गोंडा (उत्तर प्रदेश)

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