ग़ज़ल = अनिरुद्ध कुमार

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बहारें लौट आएंगीं इंतजार करो,
हवायें गीत गाएंगी ऐतबार करो। 
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हमेशा प्यार से रहना, वक़्त बदलेगा,
मुहब्बत रंग लाएगी, दिनगुजार करो। 
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डरे सहमे लगे सारे, गजब है मंजर,
खुशी फिर मुस्कुराएगी, जांनिसार करो। 
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अनूठा खेल है खेला, खेलने वाला,
उसे दुत्कारा जाएगी, दरकिनार करो। 
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भरोसे पर गुजारो दिन, बेकरार न हो,
दवा दारू बचाएगी, खबरदार करो। 
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गुलों में खार भी होते, सोच लो प्यारे,
फिजायें गुल खिलाएगी, आँख चार करो। 
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यहाँ अनि को यही कहना यह लड़ाई है,
शरारत मात खाएगी, चमत्कार करो। 
= अनिरुद्ध कुमार सिंह, धनबाद, झारखंड

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