ग़ज़ल - अनिरुद्ध कुमार 

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करो ना प्यार की बातें, सनम इकरार की बातें,
कहे पहले हमींसे तुम, हँसी दिलदार की बातें।
                         
भुलाए भूल ना पाये, बितायें साथ हर यादें,
हमें तो भा गई सारी, कि ये इजहार की बातें।
                         
लगे हरदम तराना सा, बड़ी मौसम सुहाना सा।
सुनाई आज भी देता, मधुर झंकार की बातें।
                          
हवायें गा रही सुन ले, महकते इन फिजाओं में,
हमेशा याद आती है,  कहे इकरार की बातें।
                          
लगे सब कुछ अजूबा सा, सुहानी शाम सौगातें
बहारों की हँसी सूरत, निगाहें चार की बातें।
                            
किसे परवा जमाने की, मिले बिंदास हम दोनो,
इशारों में किये सारे, यहीं तकरार की बातें।
                             
अभी भी याद वो मंजर, जमीं पर बैठते हरदम।
कहाँ' अनि' को फिकर कोई, किये दरकार की बातें।
अनिरुद्ध कुमार सिंह, धनबाद, झारखंड।

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