ग़ज़ल - अनिरुद्ध कुमार 

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बहारें गीत गायेंगी, सुबह का इंतजार करो
हवायें झूम जायेंगी, जरा सा ऐतबार करो।
                         
गुलों पे आ रही लाली, खुशनुमा रंग छितराये।
अंधेरा दूर होने को, जिगर ना बेकरार करो।
                        
उजाले मेंं लगे सुंदर, निगाहों को सकूं आये,
फिजा गुलजार हो जाये, मजे से आँख चार करो।
                        
सुरीली बांसुरी बाजे, लगे कोई यहाँ गाये।
रंगीले फूल इतराये, लुभाये दिल निसार करो।
                         
कली विहसे शमा बांधे, निगाहें दूर तक जाये।
हरी वादी सुहानी सी फिदा हो खुशगवार करो।
                           
अजूबा सा लगे दुनिया, रुहानी प्यार बलखाये।
यहाँ पर उलझनें काफी, सभीको दरकिनार करो।
                           
जहाँ तो प्यार का मंदिर, यहाँ पर प्यार हीं पूजा।
चलो 'अनि' भी चले साथी, मुहब्बत बेसुमार करो।

- अनिरुद्ध कुमार सिंह, धनबाद, झारखंड
 

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