ग़ज़ल - अनिरुद्ध कुमार

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बुढ़ापा हँसे जब सहारा मिले,
रखे ख्याल कोई दुलारा मिले।
               
रहे ना फिकर दिल भरोसा करे,
गुजर चैन से बस गुजारा मिले।
                
यही वो उमर चाहता हौसला,
लगा ले गले जब इशारा मिले।
                
सदा दिल पुकारे करीबी लगे,
नजर चाँद समझे सितारा मिले।
                 
जवानी नहीं जो मचलते फिरे,
यही चाहते सब किनारा मिले।
                
कदरदान अपना कहे प्यार से,
सदा खुशनुमा यह पसारा मिले।
                 
रहे बेफिकर हो बुढ़ापा जवां,
हँसी जिंदगी 'अनि' दुबारा मिले।
- अनिरुद्ध कुमार सिंह, धनबाद, झारखंड

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