गज़ल = डा० नीलिमा मिश्रा

गज़ल = डा० नीलिमा मिश्रा

नव संवत्सर का स्वागत सत्कार करो ।
विश्व गुरू भारत की जय जयकार करो। 

मात-पिता, भाई- बहनों से प्यार करो ।
जीवन की बगिया ऐसे गुलज़ार करो ।।

पल में तोला पल मे माशा जो होते ।
ऐसों लोगों से ना तुम तक़रार करो ।।

आशाओं के दीप जलाओ राहों में ।
सपने जो देखो उनको साकार करो।।

आँखों से आँखों का मिलना है लाज़िम ।
दिल से दिल की बातें भी दो चार करो।।

पत्थर को जो मोम बना दे पल भर मे।
जादू वाली नज़रों से तुम वार करो।।

दिल पर पत्थर रख के जीवन मत काटो ।
छोटी-छोटी ख़ुशियों को स्वीकार करो ।।

इक-इक करके तारे रौशन हो जायें ।
 मौला, मेरी राहें भी उजियार करो।।

कोरोना संकट दूर करो मेरे राघव ।
मानव का हर दर्द मिटे उद्धार करो।।


राहों में जो थक के बैठ गये साथी ।
उनकी राहें भी थोड़ी  हमवार करो।

बात पते की नीलम तुमसे  कहती है
इश़्क करो औ डूब के दरिया पार करो ।

= डा० नीलिमा मिश्रा , प्रयागराज
 

Share this story