गज़ल = डा० नीलिमा मिश्रा

गज़ल = डा० नीलिमा मिश्रा

एक ही म्यान में दो तेग़ नही आएगी

कोरोना मेरी तेरे से  निभ पाएगी।।

जो थे कमजोर उन्हें तूने डराया था बहुत

सामना मुझसे हुआ जान तेरी जाएगी ।।

लाश के ढेर पे तू बैठ के इतराता है

तेरी मैय्यत पे ज़माने को हँसी आएगी ।।

लाख इंसां मरे लाखों हुए घर से बेघर

मुल्क में ऐसी तबाही नही फिर आएगी ।।

अपनी शतरंज समेटो ये प्यादों को उठाओ।

तुझको अब मात भी वैक्सीन से दी जाएगी ।।

दोस्त अहबाब का सब हाल मिले फ़ोन पे ही

अब गले मिलने की चाहत ही निकल जाएगी ।।

नीलिमा वक़्त बदलता है ज़रा सब्र करो

चंद लम्हों में सुनहरी सी सहर आएगी।।

= डा० नीलिमा मिश्रा, प्रयागराज

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