ग़ज़ल = विनोद निराश 

pic

गाफिल वो मेहरबां हो गया,
मुकद्दर जाने कहाँ, सो गया। 

आता है जब ख्याल उसका ,
सोचता हूँ वो कहाँ, खो गया। 

तमाम रात उसकी ही यादें,
सुकूनो-चैन बेचैन, हो गया।  

लाया जो इक प्याम कासिद,
खुश्क आँखे पुरअसर, धो गया।  

मत पूछो क़िस्सा -ए- उल्फत,
बीज इश्क़ का ऐसा, बो गया। 

देखा जो दरीचे से ख्वाब में ,
बेख्याली मे दिल , रो गया। 

सज-धज के ऐसे हुए रुखसत ,
लगे जिस्म से दिल, वो गया।

ख्वाहिशे बेआबरू सी हो गयी, 
जिहन-ओ-दिल बोले, लो गया। 

मुँह फेर के वो ऐसे चले निराश,
ख्याल मेरा बेख्याल, हो गया।

 = विनोद निराश , देहरादून 
 

Share this story